अंजीर का कम्पोट
सबसे पहले ये कह दूं कि ये कम्पोट उन चीज़ों में से है जिसमें ज़्यादा सख़्ती करने की ज़रूरत नहीं। बस कढ़ाही गैस पर रखो और धीरे-धीरे खुशबुएं बोलने लगती हैं। नींबू का छिलका जब गुलाबजल और शहद के साथ उबलता है, तो एक ताज़ा और साफ़ सी खुशबू आती है जो इंसान को पीछे ले जाती है। वहीं, जहां दादियाँ रसोई में होती थीं। जब ताज़े अंजीर गरम शरबत में डालते हो, तो वो जल्दी नरम हो जाते हैं, बस ध्यान रहे कि मसल न जाएं। नाशपाती के साथ भी यही है। मुझे पसंद है कि नाशपाती में थोड़ा सा टेक्सचर रहे, पूरी तरह गल न जाए। इसलिए पाँच मिनट काफी हैं। उससे ज़्यादा मत करना, भरोसा रखो, नतीजा बेहतर होगा। इसके बाद फलों को निकाल लो और शरबत को धीमी आंच पर गाढ़ा होने दो। उसकी हल्की-हल्की उबलने की आवाज़? वही आवाज़ कहती है, थोड़ा सब्र करो, अभी खत्म नहीं हुआ। जब वो शरबत फलों पर डालते हो और ठंडा होने देते हो, तो ऐसा कम्पोट बनता है जो चाय के साथ भी अच्छा लगता है और खाने के बाद भी। यहाँ तक कि नाश्ते में भी, क्यों नहीं?
- समय: 40 मिनट
- सर्विंग: 4
स्रोत: Ashpazkhune
सामग्री
- पानी
- pc दालचीनी की छड़ी
- शहद
- pc नाशपाती
- pc नींबू का छिलका
- गुलाब जल
- pc वनीला फली
- ताज़ा अंजीर